टाइम्स नाउ मध्य प्रदेश विशेष संवादाता मनोहर अग्रवाल बैतूल
संत के अंतिम संस्कार में राष्ट्रीय हिंदू सेना ने निभाया धर्म और कर्तव्य
जिला अस्पताल में ली थी अंतिम सांस, प्रदेश अध्यक्ष दीपक मालवीय ने दी मुखाग्नि
पुलिस की सहमति के बाद संत समाज की उपस्थिति में किया अंतिम संस्कार
बैतूल। अच्छे कर्मों का फल हमेशा अच्छा होता है, और जिसका कोई नहीं होता, उसका खुद ईश्वर होता है। इस कहावत को राष्ट्रीय हिंदू सेना ने चरितार्थ कर दिखाया जब उन्होंने महान योगाचार्य और संत स्वामी दयानंद ब्रह्मचारी का हिंदू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार किया। मां ताप्ती नदी के तट पर प्रदेश अध्यक्ष दीपक मालवीय सहित संगठन के सभी पदाधिकारियों ने परिवार की तरह सेवा करते हुए संत का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार किया। प्रदेश अध्यक्ष दीपक मालवीय ने स्वामी जी को मुखाग्नि दी और उनकी अस्थियों का विसर्जन मां ताप्ती नदी में किया गया। यह भावुक क्षण देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। राष्ट्रीय हिंदू सेना ने यह साबित कर दिया कि सेवा ही सच्चा धर्म है और महान संत को विधिपूर्वक विदा कर एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया।
स्वामी दयानंद ब्रह्मचारी का बैतूल जिला अस्पताल में उपचार के दौरान निधन हो गया था। पांच दिन पूर्व उन्हें पैरेरिक्स अटैक आया था, जिसके बाद उन्हें आमला अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन हालत बिगड़ने पर जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया था। वहां उपचार के दौरान 23 मार्च को उन्होंने अंतिम सांस ली।

- मथुरा वृंदावन के निवासी थे दिवंगत संत
राष्ट्रीय हिंदू सेना के जिला अध्यक्ष अनुज राठौर ने बताया कि स्वामी दयानंद ब्रह्मचारी मूल रूप से मथुरा वृंदावन के श्री हरीं मंदिर, कैलाश नगर, वृंदावन बांगर (उत्तर प्रदेश) के निवासी थे। वे संपूर्ण भारत में धार्मिक यात्रा करते थे। एक माह पूर्व वे आमला स्थित हरिओम दरबार हनुमान मंदिर, रेलवे डेम बेल नदी पहुंचे थे, जहां वे निवास कर रहे थे।
प्रदेश संयोजक पवन मालवीय ने बताया कि स्वामी जी की तबीयत खराब होने पर संत दिलीप दुर्वासा पूरी, प्रखर सोनपुरे और बजरंग दल के नगर सह संयोजक अंशुल सोलंकी ने उन्हें आमला अस्पताल में भर्ती कराया था। वहां से गंभीर स्थिति में उन्हें बैतूल जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया, जहां उनके उपचार की जिम्मेदारी संत दिलीप दुर्वासा पूरी संभाल रहे थे। - योग शालाओं के बड़े गुरु माने जाते थे दिवंगत संत, विदेश यात्रा भी की
राष्ट्रीय हिंदू सेना से मिली जानकारी के अनुसार स्वामी दयानंद ब्रह्मचारी ने 1996 में मथुरा में मठ और आश्रम का निर्माण किया था। वे एक प्रतिष्ठित योग गुरु थे, जिनसे कई शिष्य जुड़े हुए थे। उनका बैतूल जिले के सारणी-बगडोना स्थित बैकुंठ धाम आश्रम में भी आना-जाना था। उनके परिवार में कोई भी सदस्य नहीं था, इसलिए उनके निधन के बाद राष्ट्रीय हिंदू सेना ने उनका अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया। हरिओम दरबार हनुमान मंदिर आमला के पूजनीय संत एवं मां ताप्ती परिक्रमा पदयात्री दिलीप दुर्वासा पूरी ने बताया कि स्वामी जी का आध्यात्मिक सफर काफी बड़ा था। वे विदेश यात्राएं भी कर चुके थे और योग शालाओं के बड़े गुरु माने जाते थे।

- अंतिम संस्कार में इनकी रही महत्वपूर्ण भूमिका
राष्ट्रीय हिंदू सेना के नगर युवा संयोजक रोहित मालवीय ने बताया कि प्रदेश अध्यक्ष दीपक मालवीय, सहयोगी समाजसेवी गोलू उघड़े, प्रदेश संयोजक पवन मालवीय, नगर महामंत्री बिट्टू गोयल, प्रखंड मंत्री अरविंद मासोदकर, नगर युवा उपाध्यक्ष प्रिंस साहू, बजरंग दल आमला नगर सह संयोजक अशुल सोलंकी, किशोर गिरी गोस्वामी, सेवक चौधरी, मोनू राठौर और राजेंद्र जायसवाल सहित कई कार्यकर्ताओं की उपस्थिति में स्वामी जी का अंतिम संस्कार किया गया। मां ताप्ती घाट खेडी सावलीगढ़ पर संतों की उपस्थिति में पूरे विधि-विधान के साथ संस्कार संपन्न हुआ। संत समाज ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।